Cesarean delivery SideEffects: मां (Mother)बनने का सुख एक मां से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता है. मां बनने की प्रक्रिया में सिजेरियन तकनीक (cesarean delivery)ने बहुत सहयोग किया है. प्रसव के कई प्रकार के जोखिमों के चलते जिन महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी में मां या बच्चे की जान को खतरा था, सिजेरियन ने उन खतरों को कम कर दिया है. लेकिन आजकल लोग दर्द से बचने या फिर तय तारीख पर प्रसव की प्रियारिटीज के चलते सिजेरियन पर ज्यादा जोर देते हैं. लेकिन सिजेरियन डिलीवरी के भी अपने कुछ नुकसान हैं. नॉर्मल डिलीवरी की अपेक्षा इसमें लेबर पेन के बिना बच्चे का जन्म तो हो जाता है लेकिन डिलीवरी के बाद मां के शरीर को सिजेरियन ऑपरेशन (cesarean delivery side effects)के कई साइड इफेक्ट झेलने पड़ते हैं. चलिए जानते हैं कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद मां को क्या क्या साइड इफेक्ट झेलने पड़ते हैं. 

होती है स्लो रिकवरी 

देखा जाए तो सिजेरियन डिलीवरी में वक्त बहुत कम लगता है लेकिन इसके बाद एक मां को अपने शरीर को वापस सामान्य अवस्था में लाने यानी रिकवरी करने में काफी वक्त लगता है. सिजेरियन सेक्शन में सर्जरी के बाद लगने वाले टांके ठीक होने में कई सप्ताह लग जाते हैं. ये टांके काफी दर्दभरे होते हैं और मां को इस दौरान उठने बैठने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. कई बार टांके पक जाते हैं जिससे मां को बहुत सारी दिक्कतें हो जाती हैं और अलग से दवाएं भी चलती हैं जो सिजेरियन के बाद सर्जरी के दर्द को कम करने के लिए आमतौर पर दी जाती है. देखा जाए तो नॉर्मल डिलिवरी की अपेक्षा एक महिला को सिजेरियन डिलीवरी के बाद वापस सामान्य अवस्था में लौटने में तीन से चार माह लग जाते हैं. 

इंफेक्शन का खतरा 

सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं को कई तरह के संक्रमण यानी इंफेक्शन के जोखिम हो जाते हैं. इसमें सबसे बड़ा जोखिम है एंडोमेट्रियोसिस इंफेक्शन. ये एक तरह का इंफेक्शन है जिसके चलते गर्भाशय के अंदर बनने वाली कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर ही बनने लगती है. 

एनीमिया का खतरा

नॉर्मल डिलीवरी की अपेक्षा सिजेरियन डिलीवरी में मां को काफी ज्यादा ब्लड लॉस होता है. दरअस इस सर्जरी के दौरान गर्भाशय काट कर शिशु को बाहर निकाला जाता है जिससे काफी खून बहता है.नॉर्मल डिलीवरी की अपेक्षा ये ब्लड लॉस बहुत ज्यादा होता है. ऐसे में मां के शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है और मां को एनीमिया भी होने का खतरा हो जाता है. 

प्लेसेंटा एक्रीटा होने का खतरा होता है

कई सारी डिलीवरी खासकर पहली बार होने वाले सी सेक्शन के बाद मां के पेट में शिशु से जुड़ी गर्भनाल यानी प्लेसेंटा गर्भाशय के पास पास या फिर यूरिनरी ब्लैडर में खिसक जाती है. इससे मां और होने वाले बच्चे दोनो को खतरा पैदा हो जाता है.

पेट से जुड़ी दिक्कतें हो जाती हैं 

सिजेरियन डिलीवरी के बाद मां को काफी समय तक कब्ज का सामना करना पड़ता है. मां को पेट में टांके लगने के कारण झुकने में दिक्कतें आती हैं. पेट में टांके लगने के कारण काफी समय तक खिंचाव की स्थिति रहती है.

 

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