Finland World Happiest Country: वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2023 में दुनिया का सबसे खुशहाल देश फिनलैंड को बताया गया है. लगातार छठी बार ऐसा हुआ है, जब फिनलैंड हैप्पीनेस रैंकिंग में पहले स्थान पर रहा है. इस लिस्ट में फिनलैंड के बाद दूसरे नंबर पर डेनमार्क और तीसरे पर आइसलैंड है. सवाल है कि फिनिश नागरिक बाकी देशों के लोगों की तुलना में ज्यादा खुश क्यों हैं? दरअसल फिनलैंड में कई ऐसी खास बातें हैं, जिनकी वजह से इसे हैप्पीनेस लिस्ट में टॉप रैंकिंग मिली है, जैसे- लोवर इनकम इनिक्वालिटी (हाईएस्ट पेड और लोवेस्ट पेड के बीच का कम अंतर), हाई सोशल सपोर्ट, फैसले लेने की आजादी और कम भ्रष्टाचार. ये सभी बातें फिनलैंड को एक खुशहाल देश बनाती हैं.  

सिर्फ इतना ही नहीं, फिनलैंड में एक अच्छा पब्लिक फंडेड हेल्थकेयर सिस्टम है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बात करें तो यहां ये काफी विश्वसनीय और सस्ता है. यहां के हेलसिंकी एयपोर्ट को पूरे उत्तरी यूरोप में सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है. फिनलैंड, नॉर्वे और हंगरी तीनों देशों में एक जैसी इनकम इनिक्वालिटी है. लेकिन फिर भी फिनलैंड में लोग इन दोनों देशों की तुलना में ज्यादा खुश हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वर्ल्ड इनिक्वालिटी डेटाबेस के मुताबिक, फिनलैंड में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले लोगों का दसवां हिस्सा पूरे इनकम का (33 प्रतिशत) का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा ही घर लेकर जाता है. ये ब्रिटेन में 36 प्रतिशत और अमेरिका में 46 प्रतिशत समान समूह के उलट है.

भारत खुशहाल क्यों नहीं?

हो सकता है कि आपको ये डिफरेंस बहुत ज्यादा न लगे, लेकिन इनका लोगों की खुशी पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है. क्योंकि कई असमान देशों में कुछ लोगों को काफी कम और कुछ लोगों को बहुत ज्यादा सैलरी मिलती है. इसके अलावा, स्वतंत्रता लोगों के लिए बहुत ज्यादा मायने रखती है. जिस देश के लोगों के पास स्वतंत्रता न हो, वो देश कैसे खुश रह सकता है और जिस देश के लोगों में तरह-तरह की बातों का डर हो, वो देश भी कैसे खुश रह सकता है. इन सभी बातों से यह समझा सकता है कि क्यों तुर्की और भारत खुशहाल देशों की लिस्ट में इतने पीछे हैं. इस लिस्ट में भारत को 125वें पायदान पर और तुर्की को 106वें स्थान पर रखा गया है. जबकि खुश रहने के मामले में सबसे खराब देश अफगानिस्तान है, जो आखिरी पायदान पर है.

  

फिनलैंड के लोग काफी आत्मसंतुष्ट

फिनलैंड इकोनॉमिक और सोशल सक्सेस के 100 से ज्यादा ग्लोबल मेजर्स में पहले, दूसरे या तीसरे नंबर पर है, वो भी नॉर्वे से काफी बेहतर. आप यह भी कह सकते हैं कि फिनलैंड के लोग काफी आत्मसंतुष्ट होते हैं. कई देशों में असमानताएं बहुत ज्यादा हैं, फिर चाहे वो हेल्थकेयर सेक्टर हो, सैलरी का मामला हो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सवाल हो या एजुकेशन हो. कहीं न कहीं ये असमानताएं ही ‘हैप्पीनेस’ का पैमाना तय करती हैं. 

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